शुक्रवार, 16 जनवरी 2009

'गायों ने मुझे सोने नहीं दिया'

 
अमेठी में डेविड मिलिबैंड और राहुल गाँधी
मिलिबैंड ने ग्रामीण योजनाओं में काफ़ी दिलचस्पी ली

ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड के जीवन का अनूठा अनुभव था कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के गाँव सेमरा में रात बिताना.

कूटनीतिक गहमागहमी से दूर डेविड मिलिबैंड उत्तर भारत के ग्रामीण जीवन को नज़दीक से समझने के लिए राहुल के निमंत्रण पर वहाँ पहुँचे थे.

चटाई पर ज़मीन पर बैठकर किरासन तेल वाले लैम्प की रोशनी में मिलिबैंड ने ग्रामीण औरतों की बातें सुनीं, राहुल गाँधी उनके लिए दुभाषिए का काम करते रहे.

मिलिबैंड और राहुल गांधी महिलाओं के एक समूह से मिले जो आत्मनिर्भरता के लिए प्रयासरत हैं, वे हर सप्ताह 20 रूपए जमा करके अपना एक कोष तैयार कर रही हैं ताकि उसका साझा निवेश करके कुछ लाभ कमा सकें.

इस समूह की एक महिला ने मिलिबैंड को बताया, "हमारे पास थोड़ा पैसा होता तो लगता है कि कुछ हमारे नियंत्रण में है, हमें ऊँची जाति के लोगों जैसा महसूस होता है."

इन महिलाओं में एक नया आत्मविश्वास आया है, उनमें से एक ने कहा, "अब अगर कोई अधिकारी हमसे रिश्वत माँगेगा तो हम उसकी पिटाई कर देंगे." इस पर सब लोग खूब ज़ोर से हँसे.

जीत का राज़

मिलिबैंड को एक स्थानीय नेता से मिलवाया गया जो नौ बार चुनाव जीत चुके हैं, मिलिबैंड ने कौतूहल से पूछा, "नौ बार? क्या है आपकी सफलता का राज़?"

मिलिबैंड अलाव सेंकते हुए
अलाव पर गाँव का हाल जानते मिलिबैंड

दुभाषिए की भूमिका निभा रहे राहुल गांधी ने कहा, "ग्रासरूट का ध्यान रखना."

मिलिबैंड ने माना, "हाँ, बिल्कुल, जनता से नज़दीक रहना बहुत ज़रूरी है."

राहुल गांधी और मिलिबैंड दोनों युवा हैं, दोनों महत्वाकांक्षी हैं और मौजूदा पदों से ऊपर जाने की हसरत ज़रूर रखते हैं इसलिए यह उनके लिए बहुत अहम बात है कि वे ज़मीन से जुड़े रहें.

अमेठी को इसलिए चुना गया क्योंकि वह राहुल गांधी का निर्वाचन क्षेत्र है, जहाँ से उनके माता-पिता दोनों ही सांसद रह चुके हैं.

गज़ा और पाकिस्तान में चल रही कूटनीतिक गहमागहमी से समय निकालकर मिलिबैंड ने उस समाज को जानना चाहा जिसे वे ख़ुद 'दी अदर इंडिया' कहते हैं.

राहुल ने कहा, "बहुत सारे लोग भारत आते हैं तो उनके दिमाग़ में सिर्फ़ मुंबई, दिल्ली और बंगलौर जैसे शहरों की छवि होती है, मुझे लगा कि विदेशी मंत्री को ग्रामीण भारत दिखाना दिलचस्प होगा, ख़ास तौर पर यह देखना कि महिलाएँ किस तरह अपने जीवन की दिशा बदल रही हैं."

कनेक्शन डाउन

इससे पहले दोपहर में राहुल और मिलिबैंड का काफ़िला धूल उड़ाता सेमरा गाँव पहुँचा था जहाँ लोगों में ख़ासा उत्साह दिखाई दे रहा था. इन लोगों ने स्कूलों, मोतियाबंद का इलाज करने वाले एक अस्पताल और एक डेयरी का दौरा किया जहाँ सबको दूध का वाजिब दाम मिलता है.

उन्हें सेमरा लाने का आइडिया राहुल का था

वे गाँव में मोबाइल फ़ोन की एक दुकान पर भी गए जहाँ दुकानदार ने जोश में आकर कहा कि वहाँ 80 प्रतिशत लोगों के पास मोबाइल फ़ोन है.

राहुल गांधी ने बात को संभालते हुए कहा कि "ये थोड़ा बढ़ाकर बोल रहे हैं लेकिन मोबाइल कनेक्शन की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है." मोबाइल दुकानदार ने बताया कि वे रोज़ पाँच से दस फ़ोन बेचते हैं.

विदेश मंत्री मिलिबैंड ने कहा कि वे अपने ब्लॉग पर कुछ लिखना चाहते हैं, राहुल गांधी ने बताया कि "ईमेल करने के सात रुपए (एक पेंस) लगते हैं." दुकानदार को पैसे दिए गए लेकिन अफ़सोस कि कनेक्शन डाउन था.

मिलिबैंड ने कहा, "दिल्ली तक दस रुपए में पाँच मिनट बात हो जाती है, इससे लोगों के जीवन में बहुत अंतर आता है."

मोबाइल की दुकान से जब काफ़िला आगे बढ़ा तो लोग 'राहुल गांधी ज़िंदाबाद' के नारे लगा रहे थे.

मुश्किल रात

आधी रात के बाद मिलिबैंड को टॉर्च की रोशनी में उनके 'शयनकक्ष' तक ले जाया गया जो ईंट से बनी एक झोपड़ी थी, जिसकी दीवारों पर चूना पुता हुआ था और खिड़कियाँ हरे रंग से रंगी गई थीं.

'हैलो, मैं ब्रितानी विदेश मंत्री हूँ'

उन्हें सोने के लिए रस्सी की बुनी हुई आम चारपाई ही दी गई थी. अपने कमरे में जाते हुए ब्रितानी विदेश मंत्री ने कहा, "गुड नाइट, बीबीसी." इसके बाद हम अपने गेस्ट हाउस के कमरे में लौट आए.

अगली सुबह हमारे लिए सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या उन्हें उस चारपाई पर नींद आई. मिलिबैंड ने कहा, "मुझे मानना पड़ेगा कि यह कठिन रात थी, गायों ने मुझे सोने नहीं दिया. लेकिन मेरा मानना है कि हमने स्थानीय लोगों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने की कोशिश के तहत ऐसा किया था."

उन्होंने माना कि "सुबह पाँच बजे उठना एक चुनौती थी."

ख़ैर, ये सब देखते-देखते निबट गया और मिलिबैंड अपने जेट में बैठकर मुंबई के लिए रवाना हुए जहाँ से उन्हें इस्लामाबाद जाना था.

ब्रितानी विदेश मंत्री अपने नए अनुभवों से काफ़ी ख़ुश नज़र आए और उन्होंने वह सब अपनी आँखों से देखा-महसूस किया जो पहले किसी विदेश मंत्री ने नहीं किया था, भारत की उभरती शक्ति को सिर्फ़ आंकड़ों से समझने के बदले उसे पास से देखा. 

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